कहानी – पार्ट 2: आखिर मैंने खुद को संभालना कैसे सीखा?
Anonymous
Author
लेकिन कुछ समय बाद चीजें बदलने लगीं। वो धीरे-धीरे मुझे इग्नोर करने लगी। पहले जैसी बातें नहीं होती थीं और मुझे समझ आने लगा था कि शायद अब वो मुझसे दूर जाना चाहती है।
मैं उससे इतना अटैच हो चुका था कि उसके बिना रहने के बारे में सोच भी नहीं सकता था।
फिर एक दिन उसने मुझे छोड़ दिया।
उसके बाद मेरी हालत ऐसी हो गई थी कि मैं दिन-रात उसी के बारे में सोचता रहता था। घर आता था तो अकेले बैठकर रोने लगता था। कई बार तो ऐसा लगता था कि उसके बिना जिंदगी में कुछ अच्छा ही नहीं बचा।
ऊपर से एक डर हमेशा लगा रहता था कि कहीं घरवालों को ऑफिस में मेरे इस रिलेशनशिप के बारे में पता न चल जाए।
ऑफिस में भी मैं किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। कई बार तो ऑफिस में ही रोने लगता था। मैं पूरी तरह से स्ट्रेस में रहने लगा था।
बाद में मुझे पता चला कि वो मेरे अलावा भी 4-5 लड़कों के साथ इसी तरह का व्यवहार कर चुकी थी। ये जानकर मुझे और ज्यादा बुरा लगा।
फिर मैंने सोचा कि कुछ दिन के लिए जगह बदल लेता हूँ। शायद माहौल बदलने से मेरा दिमाग थोड़ा शांत हो जाए।
इसीलिए मैं कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया।
वहाँ जाकर धीरे-धीरे मेरा माइंड फ्रेश होने लगा। नए लोगों से मिला, नई जगह देखी और कुछ समय के लिए पुरानी चीजों से ध्यान हटने लगा।
लेकिन सच बताऊँ तो चंडीगढ़ जाने से सिर्फ मेरा माहौल बदला था, मेरे अंदर चल रही चीजें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।
फिर जब मैं चंडीगढ़ से वापस आया, तो मैंने अपनी जिंदगी में कुछ ऐसे बदलाव किए, जिनसे धीरे-धीरे मैं उस दौर से बाहर निकल पाया।
आखिर मैंने खुद को कैसे संभाला और कैसे मूव ऑन किया? इसकी कहानी अगले पार्ट में बताऊँगा।
Show support without words: