मेहनत और धोखे की जंग
Anonymous
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कंपनी की सीनियर मैनेजर अदिति को लगता था कि पूरी कंपनी सिर्फ उसी के दम पर चल रही है। फाउंडर और CEO अनुराग को भी उस पर पूरा भरोसा था। लेकिन अदिति ने सबके सामने ऐसी एक्टिंग की और सबको धोखे में रखा कि वह कंपनी के भले के लिए ही सब कर रही है। पर सच तो यह था कि वह काम को उलझा रही थी ताकि उसके अलावा कोई और उसे समझ न सके, और जो वह अंदर ही अंदर करना चाहती थी वह सिर्फ वही जानती थी। एक दिन इसी घमंड में कि "मेरे बिना इनका काम ठप हो जाएगा", उसने कंपनी छोड़ दी।
लेकिन अनुराग एक समझदार और स्मार्ट लीडर था। अदिति के जाने के बाद, अनुराग ने सारी जिम्मेदारियां काव्या को दीं, जो कंपनी की सबसे ज्यादा मेहनत करने वाली एंप्लॉई थी। काव्या ऑफिस का डेली काम और मैनेजमेंट संभालने लगी।
अदिति के जाने के बाद उसके बाकी काम रिया को सिखाए गए, जो कंपनी में नया काम सीखने के लिए आई थी। यह इसलिए किया गया ताकि सारा बोझ अकेले काव्या पर न पड़े। काव्या ने रिया को धीरे-धीरे सारा काम सिखाया और ट्रेन किया ताकि रिया आगे चलकर कंपनी का एक बड़ा हिस्सा संभाल सके।
जैसे-जैसे रिया को काम मिलने लगा, उसे अनुराग की सख्त पर्सनालिटी से डर और जलन (Insecurity) होने लगी। उसे लगा कि जब तक अनुराग CEO के पद पर है, वह कभी आगे नहीं बढ़ पाएगी। उसने अंदर ही अंदर कंपनी के सिस्टम को खराब करने की प्लानिंग शुरू कर दी। लेकिन रिया यह भूल गई थी कि अनुराग एक साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट भी था!
रिया ने एक चाल चली। वह ऑफिस में अपने एक मेल फ्रेंड को लेकर आई, सबसे मिलवाया और काव्या से खास तौर पर इंट्रोड्यूस करवाया। तीनों मिलकर मूवी देखने भी गए। फिर रिया ने उस लड़के को काव्या के करीब भेजा। उस लड़के ने काव्या को मैसेज करके भड़काना और मैनिपुलेट करना शुरू किया:
"तुम इतना काम क्यों करती हो? यह तुम्हारा काम थोड़ी न है, दिन भर क्यों लगी रहती हो?"
भोली काव्या समझ ही नहीं पा रही थी कि यह सब अचानक क्यों हो रहा है और उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ कोई बड़ी चाल चली जा रही है।
इसके बाद ऑफिस में कुछ अलग ही चीजें शुरू हुईं। CEO अनुराग कुछ खास चीजें नोट करना चाहता था, इसलिए डेली मीटिंग्स रखी गईं। इस बीच, कुछ ऐसी सीक्रेट बातें जो सिर्फ काव्या को पता थीं और उसे रिया से छिपाने को कहा गया था, वह अगले ही दिन रिया को पता चल जाती थीं। अनुराग यह सब साइलेंट डिजिटल लॉग्स और मॉनिटरिंग के जरिए चुपचाप नोटिस कर रहा था।
रिया ने काव्या को टारगेट बनाना शुरू कर दिया ताकि वह उसके कंट्रोल में आ जाए। रिया का असली मकसद अनुराग को CEO पोस्ट से हटाकर खुद उस जगह पर बैठना और पूरी मैनेजमेंट अपने हाथ में लेना था।
उसने अपने पिता के जरिए कंपनी में बड़ा इन्वेस्टमेंट करवाने की कोशिश की, ताकि शेयर्स के दम पर अनुराग को हटाया जा सके। लेकिन कंपनी पहले से ही फायदे (Profitable) में थी और उसे किसी बाहरी इन्वेस्टमेंट की कोई जरूरत नहीं थी।
रिया ने कंट्रोल पाने के लिए लीडरशिप और मैनिपुलेशन की क्लासेज भी लेनी शुरू कर दीं। ऑफिस के अंदर रिया और काव्या आपस में बात तक नहीं करती थीं, लेकिन शाम को घर जाते वक्त या बाहर दोनों खुशी-खुशी साथ जाती थीं। रिया को लग रहा था कि उसने पूरे ऑफिस को अपने जाल में फंसा लिया है... पर वह यह नहीं जानती थी कि अनुराग को पहले दिन से रिया की हर एक चैट, हर एक चाल और हर एक मूव के बारे में सब कुछ पता था!
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