मेरी मोहब्बत मेरा जुर्म नहीं है
Anonymous
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मैं अनन्या हूँ, काव्या और मेरी पहली मुलाक़ात कॉलेज के दिनों में हुई थी। शुरुआत में हम दोनों बस बहुत अच्छे दोस्त थे। साथ में पढ़ाई करना, घंटों बातें करना, चाय की टपरी पर बैठकर सपने देखना—यह सब कब एक गहरे अहसास में बदल गया, हमें ख़ुद पता नहीं चला। जब भी काव्या मेरे पास होती, मुझे एक अलग ही सुकून महसूस होता। जब वह मेरा हाथ थामती, तो दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती थीं। धीरे-धीरे मुझे अहसास हुआ कि मेरे मन में लड़कों के लिए कभी कोई भावनाएँ थीं ही नहीं; मेरा दिल तो पूरी तरह से काव्या के लिए धड़कता था। काव्या ने भी जब अपने प्यार का इज़हार किया, तो मुझे लगा जैसे मुझे मेरी दुनिया मिल गई हो।
काव्या के घरवाले बहुत सुलझे हुए और समझदार थे। जब काव्या ने उन्हें हमारे रिश्ते के बारे में बताया, तो उन्होंने कोई ज़बरदस्ती नहीं की। वे काव्या की ख़ुशी और उसके फ़ैसले में पूरी तरह से उसके साथ थे और उन्होंने हमारे रिश्ते को दिल से स्वीकार कर लिया था।
हमारा प्यार छुप-छुपकर चल रहा था, लेकिन एक दिन मेरी लापरवाही सब पर भारी पड़ गई। काव्या ने मेरे लिए एक डायरी लिखी थी, जिसमें हमारे प्यार की हर बात, हमारी तस्वीरें और हमारे ख़त थे। एक दिन माँ जब मेरा कमरा साफ़ कर रही थीं, तो वह डायरी उनके हाथ लग गई। उस शाम जब मैं घर पहुँची, तो मम्मी-पापा और भाई हॉल में बैठे थे। माँ रो रही थीं, पापा का चेहरा गुस्से से लाल था और भाई चिल्ला रहा था।
उन्होंने मुझे घसीटकर एक अंधेरे और सीलन भरे कमरे में बंद कर दिया और बाहर से ताला लगा दिया। पापा ने धमकी दी कि अगर मैंने काव्या का नाम भी लिया, तो वे मुझे मार डालेंगे या ज़बरदस्ती किसी अजनबी लड़के से मेरी शादी करा देंगे। मेरा फ़ोन भी छीन लिया गया था। वे दिन मेरे लिए किसी ख़ौफ़नाक सपने जैसे थे। उस अकेलेपन और अंधेरे में मुझे लगता था कि मेरी चीख़ें दीवारों में घुटकर मर रही हैं।
जब दो दिनों तक मेरा कोई फ़ोन या मैसेज नहीं आया, तो काव्या परेशान हो गई। उसने मेरे घर के चक्कर लगाने शुरू किए। तीसरे दिन शाम को जब मेरा भाई घर से बाहर निकला, तो काव्या ने हिम्मत करके उसे रास्ते में रोका। भाई ने गुस्से में काव्या को सब बता दिया कि डायरी पकड़ी गई है, अनन्या कमरे में बंद है और हम उसकी शादी तय कर रहे हैं।
यह सुनते ही काव्या समझ गई कि देर की तो सब ख़त्म हो जाएगा। उसने तुरंत अपने घर वालों को पूरी बात बताई। उसके माता-पिता ने उसका हौसला बढ़ाया और एक सुरक्षित जगह का इंतज़ाम करने में मदद की। काव्या ने चुपके से रात के बारह बजे हमारे घर के पीछे आने का प्लान बनाया। वह एक सीढ़ी लेकर आई, घर की बाउंड्री वॉल चढ़कर पीछे की खिड़की तक पहुँची, लोहे की आरी से खिड़की की ग्रिल का ताला काटा और मुझे उस क़ैद से बाहर निकाला। हम सीधे गाड़ी में बैठकर एक दूर शहर के किराए के कमरे में पहुँच गए।
हम भागकर उस छोटे से कमरे में आ गए। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी और बिजली कड़क रही थी। मैं बिस्तर के कोने में बैठी काँप रही थी, घर वालों का डर और बीते दिनों का ख़ौफ़ मुझे अब भी सता रहा था। काव्या मेरे पास आई और उसने बहुत प्यार से मुझे अपनी बाहों में समेट लिया।
"अनू... अब तुम बिल्कुल सुरक्षित हो। कोई तुम्हें मुझसे दूर नहीं कर सकता," उसने मेरे कान में धीरे से कहा। उसकी गर्म साँसें मेरी गर्दन को छू रही थीं, और मेरा सारा डर पिघलने लगा।
मैंने काव्या का चेहरा अपने हाथों में लिया। उसकी आँखों में मेरे लिए बेपनाह प्यार था। उसने मेरे गालों पर बहते आँसुओं को अपने होंठों से पोंछ लिया। काव्या ने धीरे से मेरे होंठों को चूमना शुरू किया। शुरुआत में वह चुंबन बहुत धीमा और नार्म था, लेकिन धीरे-धीरे उसमें सालों की तड़प और राहत घुल गई।
उसने मेरी कमीज़ के बटन एक-एक करके खोले। उसके हाथ जब मेरी नंगी त्वचा पर रेंग रहे थे, तो मेरे पूरे शरीर में एक मीठी सिहरन दौड़ गई। उसने मेरी गर्दन, कंधों और सीने पर अपने होंठों की छाप छोड़नी शुरू की। हर एक छुअन के साथ मेरे अंदर बसा महीनों का डर और तनाव गायब हो रहा था।
काव्या ने मुझे बेड पर लिटाया और खुद मेरे ऊपर आ गई। जब उसने अपने कपड़े उतारे, तो उसकी गंदम रंगत और उसके शरीर की गर्मी ने मुझे पूरी तरह अपनी आगोश में ले लिया। उसकी उंगलियाँ मेरी पीठ पर कसती जा रही थीं। उसने मेरी नाभि से लेकर नीचे तक अपनी ज़बान और होंठों से स्पर्श किया, जिससे मेरी साँसें तेज़ हो गईं और मेरी चीख़ काव्या के गले में ही घुटकर रह गई।
जब हम दोनों एक-दूसरे की नग्नता में पूरी तरह समा गए, तो वह सिर्फ़ दो शरीरों का मिलन नहीं था—वह आत्माओं का संगम था। काव्या की हर एक लयबद्ध हरकत, उसकी गर्म साँसें, उसका मेरी उंगलियों में अपनी उंगलियाँ पिरोना, और बिस्तर की चादरों पर हमारी साँसों की हलचल... सब कुछ इतना गहरा और रूहानी था कि मुझे लगा जैसे मेरा नया जन्म हुआ हो। हमने घंटों तक एक-दूसरे के शरीर को पूरी गहराई से महसूस किया, जहाँ सिर्फ़ हमारी धड़कनें, सिसकियाँ और बेपनाह प्यार की गूँज थी।
सुबह की पहली धूप जब खिड़की से आई, तो मैं काव्या के सीने पर सिर रखकर आराम से सो रही थी। उसके बाद की ज़िंदगी आसान नहीं थी। मेरे घरवालों ने शुरुआत में ढूँढने की बहुत कोशिश की, पुलिस में शिकायत की धमकी दी और मुझसे सारे रिश्ते तोड़ लिए। उन्होंने साफ़ कह दिया कि उनके लिए उनकी बेटी मर चुकी है। लेकिन दूसरी तरफ़ काव्या के घरवाले हमेशा हमारे साथ खड़े रहे।
आज इस बात को दो साल बीत चुके हैं। हम दोनों एक नए शहर में अपने बलबूते पर नौकरी कर रहे हैं और एक सुंदर सा घर संभाल रही हैं। मेरे घरवालों से आज भी रिश्ता सुधरा नहीं है, पापा ने मुझे नहीं अपनाया है, लेकिन काव्या के परिवार का प्यार मुझे कभी अकेला महसूस नहीं होने देता।
अब हम बस इतना चाहते हैं कि समाज हमारे जैसे लोगों को शक या नफ़रत की नज़र से न देखे। हम चाहते हैं कि एक दिन मेरे घरवाले भी यह समझें कि प्यार कभी ग़लत नहीं होता। हम बिना किसी डर के, अपनी पहचान के साथ सम्मान से जीना चाहते हैं—एक-दूसरे का हाथ थामकर, हमेशा के लिए।
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