शादी के बाद मेरी शारीरिक इच्छा क्यों कम हो गई?
Anonymous
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मैंने कभी नहीं सोचा था कि अपनी ज़िंदगी की इतनी निजी बात किसी के सामने लिखूँगी। लेकिन आज मैं यह कहानी इसलिए बता रही हूँ, क्योंकि शायद कोई और भी मेरी तरह इस उलझन से गुजर रहा हो और उसे लग रहा हो कि उसके साथ कुछ गलत है।
मेरी शादी को लगभग दो साल हो चुके हैं। मेरे पति बहुत अच्छे हैं। वह मेरी देखभाल करते हैं, मेरी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं और जब मैं परेशान होती हूँ, तो मुझे समझाने की कोशिश भी करते हैं। बाहर से देखने पर हमारी ज़िंदगी बिल्कुल सामान्य लगती है।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरे अंदर कुछ बदल रहा था।
पहले जब मेरे पति मेरे करीब आते थे, तो मुझे अच्छा लगता था। मैं भी उनके साथ समय बिताना चाहती थी। उनके गले लगना, उनके साथ अकेले बैठकर बातें करना और उनके करीब महसूस करना मुझे खुशी देता था। लेकिन धीरे-धीरे मेरी शारीरिक इच्छा कम होने लगी।
शुरुआत में मैंने इसे थकान समझा। फिर लगा कि शायद काम का दबाव है। कभी घर की जिम्मेदारियाँ, कभी नींद पूरी न होना और कभी बिना किसी खास वजह के मन का उदास रहना—मैं हर बार खुद को कोई न कोई कारण देती रही।
लेकिन एक समय ऐसा आया, जब मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था कि मेरे साथ हो क्या रहा है।
मुझे याद है, एक रात मेरे पति मेरे पास आए और प्यार से मुझे गले लगाया। मैं उनसे दूर नहीं होना चाहती थी, लेकिन मेरे अंदर वैसी इच्छा महसूस नहीं हो रही थी, जैसी पहले हुआ करती थी।
मैंने उनसे कहा कि आज मेरा मन नहीं है।
उन्होंने कुछ नहीं कहा और मुझे आराम करने दिया। फिर भी उस रात मैं बहुत देर तक जागती रही।
मेरे मन में बार-बार एक ही सवाल आ रहा था—जब मैं अपने पति से प्यार करती हूँ, तो फिर मेरे अंदर शारीरिक इच्छा पहले जैसी क्यों नहीं है?
क्या मैं उनसे दूर हो रही हूँ? क्या मेरी भावनाएँ बदल रही हैं? या फिर मेरे अंदर ही कोई कमी है?
अगले कुछ दिनों तक मैं इन सवालों के बारे में सोचती रही। कभी-कभी तो मैं बिना किसी वजह के खुद को दोष देने लगती थी।
यह ऐसी बात थी, जिसे मैं अपनी सहेलियों से भी आसानी से साझा नहीं कर सकती थी। मुझे डर था कि वे मेरी बात को गलत समझेंगी या मज़ाक में उड़ा देंगी।
हमारे समाज में शादी और शारीरिक संबंधों को लेकर बहुत सारी बातें की जाती हैं, लेकिन जब कोई महिला अपनी इच्छा में बदलाव महसूस करती है, तो उसके लिए खुलकर बात करना आसान नहीं होता।
मैंने भी चुप रहना बेहतर समझा।
मेरे पति कभी-कभी पूछते थे कि क्या मैं उनसे नाराज़ हूँ। मैं हर बार कह देती थी कि ऐसा कुछ नहीं है।
सच तो यह था कि मैं खुद अपनी भावनाओं को समझ नहीं पा रही थी। मैं उन्हें कैसे समझाती?
मैं उनके साथ रहना चाहती थी, उनसे प्यार भी करती थी, लेकिन हर बार शारीरिक नज़दीकी की इच्छा महसूस नहीं होती थी।
एक दिन मैं इंटरनेट पर अपनी परेशानी का जवाब ढूँढ़ रही थी। तभी मेरी नज़र एक शब्द पर पड़ी—Libido।
मैंने इसके बारे में पढ़ना शुरू किया। मुझे पता चला कि Libido का मतलब यौन इच्छा या शारीरिक संबंध बनाने की इच्छा से है। हर व्यक्ति में इसका स्तर अलग हो सकता है और एक ही व्यक्ति में भी समय के साथ बदलाव आ सकता है।
तनाव, थकान, नींद की कमी, मानसिक स्थिति, रिश्तों में चल रही परेशानियाँ, हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाएँ भी यौन इच्छा को प्रभावित कर सकती हैं।
यह पढ़कर मुझे थोड़ी राहत मिली।
पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं अकेली नहीं हूँ। ऐसा महसूस करने वाली दूसरी महिलाएँ भी हो सकती हैं।
लेकिन मेरे मन में एक सवाल अब भी था—मेरी Libido कम क्यों हो रही थी?
इंटरनेट पर पढ़कर मैं कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकाल सकती थी। मुझे अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत थी।
कई दिनों तक सोचने के बाद आखिरकार मैंने अपने पति से बात करने का फैसला किया।
उस दिन हम दोनों रात को खाना खाने के बाद बैठे थे। मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा, “मुझे तुमसे एक बात कहनी है। लेकिन प्लीज़, मेरी बात को गलत मत समझना।”
उन्होंने मेरी तरफ देखा और कहा, “बोलो, क्या हुआ?”
मैंने उन्हें बताया कि पिछले कुछ महीनों से मेरी शारीरिक इच्छा कम हो गई है। मैंने यह भी कहा कि मैं उनसे प्यार करती हूँ, लेकिन कई बार मेरा मन शारीरिक रूप से करीब आने का नहीं होता।
मुझे डर था कि वे इसे अपने ऊपर ले लेंगे।
कुछ देर तक वे चुप रहे। फिर उन्होंने मुझसे पूछा, “क्या तुम्हें मेरे साथ अच्छा नहीं लगता अब?”
उनका सवाल सुनकर मेरी आँखों में आँसू आ गए।
मैंने कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा कि मेरे साथ क्या हो रहा है। मैं नहीं चाहती कि तुम सोचो कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती।”
उस रात हमारी बातचीत बहुत लंबी चली। मैंने पहली बार उन्हें बताया कि इस बदलाव के कारण मैं खुद को कितना दोषी महसूस कर रही थी।
उन्होंने मुझे समझाया कि मुझे अपनी इच्छा के लिए खुद को मजबूर करने की जरूरत नहीं है। अगर कोई परेशानी है, तो हम मिलकर उसे समझने की कोशिश करेंगे।
उस बातचीत के बाद मुझे ऐसा लगा, जैसे मेरे मन से कोई भारी बोझ उतर गया हो।
पहले मैं सोचती थी कि एक अच्छी पत्नी होने के लिए मुझे हमेशा अपने पति की तरह ही शारीरिक संबंधों में रुचि महसूस करनी चाहिए।
जब मेरा मन नहीं होता था, तो मुझे अपराधबोध होता था। कभी-कभी मैं सिर्फ इसलिए हाँ कहने के बारे में सोचती थी, क्योंकि मुझे डर था कि कहीं मेरे पति मुझसे नाराज़ न हो जाएँ।
लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि किसी रिश्ते में प्यार साबित करने के लिए अपनी इच्छा के विरुद्ध कुछ करना जरूरी नहीं है।
मैंने अपने शरीर और मन की बात सुनना शुरू किया। मैंने अपनी नींद, तनाव और दिनचर्या पर ध्यान देना शुरू किया। मैंने अपने पति के साथ बिना किसी अपेक्षा के समय बिताना भी शुरू किया।
हम साथ टहलने जाते, बातें करते और कभी-कभी बस एक-दूसरे के पास बैठकर फिल्म देखते।
मुझे एहसास हुआ कि भावनात्मक नज़दीकी भी मेरे लिए बहुत मायने रखती है।
हालाँकि, मैंने यह मानकर नहीं चला कि सिर्फ आराम करने से हर समस्या ठीक हो जाएगी। अगर मेरी इच्छा लंबे समय तक कम रहती या मुझे इससे परेशानी होती, तो मैं डॉक्टर से सलाह लेने के लिए भी तैयार थी।
सच कहूँ, तो मैं यह नहीं कह सकती कि सब कुछ अचानक पहले जैसा हो गया।
कुछ दिन ऐसे होते हैं, जब मैं अपने पति के ज्यादा करीब महसूस करती हूँ। कुछ दिन ऐसे भी होते हैं, जब मैं सिर्फ आराम करना चाहती हूँ।
लेकिन अब मैं हर बार खुद को दोष नहीं देती।
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